डीजल मैकेनिक थ्योरी (असिस्टेंट लोको पायलट एवं टेक्निशियन परीक्षा)

डीजल मैकेनिक थ्योरी (असिस्टेंट लोको पायलट एवं टेक्निशियन परीक्षा)…


सभी पश्चाग्र आई.सी. इंजन द्विआघात क्रिया चक्र अथवा चार आघात क्रिया चक्र पर कार्य करते हैं। द्वि-आघात इंजनों में एक क्रिया चक्र पिस्टन के दो आघातों अर्थात क्रेंक की एक परिक्रमा में पूर्ण होता है।

 द्वि-आघात इंजन में चूषण तथा निकास आघात, सिलेंडर में पोर्ट के द्वारा आंशिक संपीडित चार्ज का प्रवेश करा कर तथा उसी समय कार्यकारी अथवा प्रसार आघात के अंत में प्रवेश करने वाले चार्ज के उच्च वेग के कारण जली हुई गैसों को निकाल कर, विलोपित रहते हैं।

दूसरे शब्दों में चूषण तथा निकास के लिए अलग से आघात नहीं होते। इसलिए क्रेंक के एक घुमाव में एक शक्ति आघात होता है। नया चार्ज एक दाब तक संपीड़ित होता है जहां यह या तो स्पार्क अथवा दाब से प्रज्वलित हो जाता है।

द्वि-आघात इंजन में प्रवेश तथा निकास वाल्व स्थान पर पोर्ट होते हैं जो विशेष यंत्रावली से खुलते तथा बंद होते हैं। चार्ज oil casing में एकत्र होता है जो शक्ति आघात के दौरान संपीडित होता है। दो आघात इंजन में प्रवेश तथा निकास पोर्ट व्यासीय विपरीत रखे जाते हैं तथा पिस्टन शीर्ष इस प्रकार बनाया जाता है कि वह आने वाली गैसों को तुरंत साफ करता है तथा साथ साथ बाकी बची गैसों को सरलता से निकास पोर्ट से बाहर धकेल देता है।

एकल पम्प सिस्टम में प्रत्येक सिलेंडर के लिए अलग पम्प प्रयोग किया जाता है, जो प्रत्येक कॉमन कैम शाफ्ट पर कैम द्वारा कार्य करता है। पम्प तथा फ्यूल टैंक के बीच निम्न दाब पम्प तथा फिल्टर रखे रहते हैं।

संपीडन इग्निशन सिस्टम डीजल इंजनों में प्रयोग किया जाता है। डीजल इंजनों का संपीडन अनुपात बहुत अधिक होने से संपीडित वायु का तापमान 500 से 600 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। संपीडन स्ट्रोक के अंत में डीजल फ्यूल की बारीक फुहार इस संपीडित वायु में इंजेक्ट की जाती है, जिससे फ्यूल के कण गर्म हवा से ऊष्मा प्राप्त कर वाष्पीकृत होते हैं तथा इग्नाइट होकर जलने लगते हैं। इस सिस्टम में ईंधन का दहन संपीडित वायु के अधिक तापमान के कारण होने से किसी अन्य उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है।


स्पार्क इग्निशन पेट्रोल तथा गैस इंजनों में ईंधन का इग्निशन एवं दहन स्पार्क इग्निशन सिस्टम द्वारा किया जाता है। इस सिस्टम में संपीडन स्पार्क के बाद संपीडित चार्ज को विधुत स्पार्क से इग्नाइट कर दहन किया जाता है।

इग्निशन ऊर्जा (ignition energy) के बह्रास्त्रोत के बिना फ्यूल के आग पकड़ने की क्रिया ऑटो इग्निशन कहलाती है।

उच्च शक्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से intake air को प्रारंभ में संपीडित कर इंजन सिलेंडर को अधिक मात्रा में वायु भेजने के प्रक्रम को सुपर चार्जिंग कहा जाता है।

स्केबेजिंग इंजन सिलेंडर से जली हुई गैसों की बाहर करने का प्रक्रम Scavenging कहलाता है।

स्पार्क इग्निशन इंजन में संपीडन स्ट्रोक के समाप्त होने से पूर्व अर्थात स्पार्क प्लग में सम्पर्क आने के पूर्व मिश्रण के यकायक दहन होने की क्रिया pre-ignition कहलाती है।

फ्यूल के आंशिक भाग के अंश के शीघ्र ऑटो इगनिशन के कारण होने वाली pressure wave को डेटोनेशन कहते है।


n-heptane तथा iso-octane के मिश्रण में iso-octane का आयतन के द्वारा प्रतिशत ईंधन का ऑक्टेन नम्बर कहलाता है।

Cetane तथा n-methyl-nepthalane के मिश्रण में cetane का आयतन के द्वारा प्रतिशत cetane नम्बर कहलाता है।

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